दो दिवसीय गंगा पर्यावरण सम्मेलन आयोजित

गंगा की अविरलता के लिए आमरण अनशन कर रही मातृ सदन की अनुयाई साध्वी पद्मावती के आंदोलन की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। गंगा के लिए आमरण अनशन कर रही मातृसदन की अनुयायी साध्वी पद्मावती के समर्थन में आयोजित दो दिवसीय गंगा पर्यावरण सम्मेलन का सोमवार को समापन हो गया। देश के 17 राज्यों के अलावा नेपाल और कनाडा से आए प्रतिनिधियों ने गंगा और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई। गंगा की रक्षा के लिए पद्मावती के अनशन के समर्थन में सभी राज्यों में जन जागरण और अनशन करने का निर्णय लिया गया। संयुक्त राष्ट्र से अपील की गई कि वह भी गंगा और साध्वी पद्मावती का जीवन बचाने के लिए हस्तक्षेप करें। सम्मेलन के दूसरे दिन वक्ताओं ने इस बात पर अफसोस जताया कि केंद्र सरकार नमामि गंगे जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद गंगा की चिंता नहीं की जा रही है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि मौजूदा सरकार गंगा और पर्यावरण को लेकर संवेदनहीन है। इस मौके पर ओमवीर चैधरी, पर्यावरणविद विक्रम यादव, भाुवनेश्वरन, सिमरन, गुरलाल सिंह, शमा साबरीन, इब्राहिम खान समेत कई लोगों ने अपने विचार रखे। दो दिन तक चले सम्मेलन में यह प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें अनशन को समर्थन देने के साथ ही न्यायपालिका, सरकारों और राजनीतिक दल और संयुक्त राष्ट्र से अपील की गई कि गंगा की निर्मलता के लिए प्रभावी कदम उठाएं। इसके अलावा गंगा के विशिष्ट गुणों के ज्ञान को पूरी दुनिया में प्रचार करने के लिए अविरल गंगा जल यात्रा निकालने का भी निर्णय लिया गया। साथ ही पद्मावती के आंदोलन की सफलता और उनकी दीर्घायु की कामना की गई।